पंजाब में अगले साल यानी 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। दिल्ली में बैठी कांग्रेस की आलाकमान ने चुनावी लड़ाई जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसी क्रम में, 1 जुलाई को पार्टी ने पंजाब के लिए कई नई चुनाव कमेटियों की घोषणा की। लेकिन जैसे ही यह लिस्ट सामने आई, पंजाब से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस के गलियारों में एक नया राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया।
पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक और चंडीगढ़ से मौजूदा लोकसभा सांसद मनीष तिवारी को इन सभी कमेटियों से पूरी तरह बाहर रखा गया है। इस फैसले से नाराज मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखा है, जिसने उनके पार्टी छोड़ने की अटकलों को हवा दे दी है।
चुनाव कमेटियों, खासकर कैंपेन कमेटी और घोषणापत्र कमेटी से बाहर किए जाने के बाद, मनीष तिवारी ने 2 जुलाई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने कहा, ‘जो होना है, वह तो होगा ही।’
सोशल मीडिया पर छलका मनीष तिवारी का दर्द
मनीष तिवारी ने लिखा, “जब आपकी काबिलियत दूसरों की असुरक्षा का कारण बन जाती है, तो फैसले संगठनात्मक नहीं बल्कि व्यक्तिगत पूर्वाग्रहों से प्रेरित होते हैं। काश मेरे पास लोगों और संगठनों की असुरक्षा का कोई इलाज होता।”
उन्होंने आगे लिखा कि 1981 में उन्होंने NSUI पार्टी के लिए एक आम कार्यकर्ता के तौर पर काम करना शुरू किया था। छात्र राजनीति से लेकर यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री और सांसद बनने तक, उन्होंने अपनी ज़िंदगी के लगभग 45 साल पूरी निष्ठा के साथ कांग्रेस की सेवा में समर्पित किए हैं।
ऐसे में, इस तरह दरकिनार किया जाना पूरी तरह से हैरान करने वाला है। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि उन्होंने अपनी पोस्ट के आखिर में एक मशहूर अंग्रेज़ी गाने की लाइन लिखी – ‘Que sera, sera, Whatever will be, will be…’ यानी ‘जो होना है, वह तो होगा ही।’
है बड़ा कोई अवगुण उसमे जिसे कोई हुनर आवे I
— Manish Tewari (@ManishTewari) July 2, 2026
Wish I had an antidote ( ਗਿੱਦੜ ਸਿੰਙੀ) for the insecurities of individuals and institutions!
Having said that @INCIndia has given me enough over the past 45 years and I have also devoted my entire adult life in the service of the…










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